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सोमवार, 27 जनवरी 2014

जादुई घड़ा

एक गरीब युवक, अपनी गरीबी से परेशान होकर,
अपना जीवन समाप्त करने नदी पर गया, वहां एक
साधू ने उसे ऐसा करने से रोक दिया।
साधू ने, युवक की परेशानी को सुन कर कहा, कि मेरे
पास एक विद्या है, जिससे ऐसा जादुई घड़ा बन
जायेगा जो भी इस घड़े से मांगोगे, ये जादुई
घड़ा पूरी कर देगा, पर जिस दिन ये घड़ा फूट गया,
उसी समय, जो कुछ भी इस घड़े ने दिया है, वह
सब गायब हो जायेगा।



                                                           




अगर तुम मेरी 2 साल तक सेवा करो, तो ये घड़ा,
मैं तुम्हे दे सकता हूँ और, अगर 5 साल तक तुम
मेरी सेवा करो, तो मैं, ये घड़ा बनाने
की विद्या तुम्हे सिखा दूंगा। बोलो तुम क्या चाहते
हो,
युवक ने कहा, महाराज मैं तो 2 साल ही आप
की सेवा करना चाहूँगा , मुझे तो जल्द से जल्द, बस
ये घड़ा ही चाहिए, मैं इसे बहुत संभाल कर रखूँगा,
कभी फूटने ही नहीं दूंगा।
इस तरह 2 साल सेवा करने के बाद, युवक ने
वो जादुई घड़ा प्राप्त कर लिया, और अपने घर
पहुँच गया।
उसने घड़े से अपनी हर इच्छा पूरी करवानी शुरू कर
दी, महल बनवाया, नौकर चाकर मांगे,
सभी को अपनी शान शौकत दिखाने लगा,
सभी को बुला-बुला कर दावतें देने लगा और बहुत
ही विलासिता का जीवन जीने लगा, उसने शराब
भी पीनी शुरू कर दी और एक दिन नशें में, घड़ा सर
पर रख नाचने लगा और ठोकर लगने से घड़ा गिर
गया और फूट गया.
घड़ा फूटते ही सभी कुछ गायब हो गया, अब युवक
सोचने लगा कि काश मैंने जल्दबाजी न की होती और
घड़ा बनाने की विद्या सीख ली होती, तो आज मैं,
फिर से कंगाल न होता।
" ईश्वर हमें हमेशा 2 रास्ते पर रखता है एक
आसान -जल्दी वाला और दूसरा थोडा लम्बे समय
वाला, पर गहरे ज्ञान वाला, ये हमें चुनना होता है
की हम किस रास्ते पर चलें "
" कोई भी काम जल्दी में करना अच्छा नहीं होता,
बल्कि उसके विषय में गहरा ज्ञान
आपको अनुभवी बनाता है "

रविवार, 26 जनवरी 2014

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें :जाने गणतंत्र दिवस के बारे

गणतंत्र दिवस (Republic Dayभारत में 26 जनवरी को मनाया जाता है और यह भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है। हर वर्ष 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्‍येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्‍नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्त्वपूर्ण स्‍मृतियां हैं जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई है। 26 जनवरी, 1950 को देश का संविधान लागू हुआ और इस प्रकार यह सरकार के संसदीय रूप के साथ एक संप्रभुताशाली समाजवादी लोक‍तांत्रिक गणतंत्र के रूप में भारत देश सामने आया। भारतीय संविधान, जिसे देश की सरकार की रूपरेखा का प्रतिनिधित्‍व करने वाले पर्याप्‍त विचार विमर्श के बाद विधान मंडल द्वारा अपनाया गया, तब से 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के रूप में भारी उत्‍साह के साथ मनाया जाता है और इसे राष्‍ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है। यह आयोजन हमें देश के सभी शहीदों के नि:स्‍वार्थ बलिदान की याद दिलाता है, जिन्‍होंने आज़ादी के संघर्ष में अपने जीवन बलिदान कर दिए और विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध अनेक लड़ाइयाँ जीती।


भारत के संविधान को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्त्व था। 26 जनवरी को विशेष दिन के रूप में चिह्नित किया गया था, 31 दिसंबर सन् 1929 के मध्‍य रात्रि में राष्‍ट्र को स्वतंत्र बनाने की पहल करते हुए लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हु‌आ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की ग‌ई कि यदि अंग्रेज़ सरकार 26 जनवरी, 1930 तक भारत को उपनिवेश का पद (डोमीनियन स्टेटस) नहीं प्रदान करेगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा।


राष्‍ट्रीय ध्‍वज




26 जनवरी, 1930 तक जब अंग्रेज़ सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस लाहौर अधिवेशन में पहली बारतिरंगे झंडे को फहराया गया था परंतु साथ ही इस दिन सर्वसम्मति से एक और महत्त्वपूर्ण फैसला लिया गया कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे। इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।

शनिवार, 25 जनवरी 2014

यहाँ मिलेगा आपको हर समस्या का समाधान ?

मित्रो आप सभी को मेरा सादर नमस्कार। आज मै  आपके लिए एक ऐसी वेबसाइट लाया हूँ। जिससे क्लिक करते ही आप अपने किसी भी प्रश्न का उत्तर पा  सकते है ,या ये कह सकते है कि आप यहाँ कुछ भी पूंछ सकते है। 





अपना प्रश्न करने के लिए यहाँ क्लिक करे। 

शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

उसके पास तीन आँखे और चार हाथ थे ?

सुनकर आप थोड़े हैरान हो सकते हैं। लेकिन बात पक्की है कथा आज की नहीं बल्कि पुरानी है और इसका उल्लेख पुराणों में है। चेति देश के राजा शिशुपाल के पास चार हाथ और तीन आँखे थी। 



                                             



शिशुपाल कृष्ण की बुआ का लड़का था। दमघोष के कुल में जब शिशुपाल का जन्म हुआ तब उसके तीन नेत्र तथा चार भुजाएं थीं। वह गधे की तरह रो रहा था। माता-पिता त्रस्त होकर उसका परित्याग कर देना चाहते थे। तभी आकाशवाणी हुई कि बालक बहुत वीर होगा तथा उसकी मृत्यु का कारण वह व्यक्ति होगा जिसकी गोद में जाने पर बालक अपने भाल-स्थित नेत्र तथा दो भुजाओं का परित्याग कर देगा। उसके जन्म के विषय में जानकर अनेक राजा उसे देखने आये। शिशुपाल के पिता ने बारी-बारी से सभी की गोद में बालक दिया। अंत में शिशुपाल के ममेरे भाई श्रीकृष्ण की गोद में जाते ही उसकी दो भुजाएं पृथ्वी पर गिर गयीं तथा ललाटवर्ती नेत्र ललाट में विलीन हो गया। बालक की माता ने दुखी होकर श्रीकृष्ण से उसके प्राणों की भीख मांगी। श्रीकृष्ण ने उसके सौ अपराध क्षमा करने का वचन दिया। कालांतर में शिशुपाल ने अनेक बार अपराध किये तथा गोविंद ने उसे क्षमा किया।

                                               

युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के लिए आमन्त्रण मिलने पर सभी राजा इन्द्रप्रस्थ में इकट्ठा हुए। आमन्त्रित अतिथियों में भीष्म की आज्ञा से युधिष्ठिर ने सर्वप्रथम श्रीकृष्ण को अर्ध्य समर्पित किया (श्रीकृष्ण की अग्रपूजा की)। यह देखकर शिशुपाल को बहुत क्रोध आया। उसने कहा कि कृष्ण वृष्णिवंशी हैं, कहीं के राजा नहीं। सर्वप्रथम उन्हें अर्ध्य अर्पित करने पर शेष सबका अपमान होता है। सबके समझाने पर भी शिशुपाल अपनी बात पर अड़ा रहा तथा कुछ राजाओं के साथ वहां से चले जाने की धमकी भी देने लगा। अंत में उसने कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। कृष्ण ने सबके सम्मुख, यह स्पष्ट करते हुए कि वे शिशुपाल के सौ अपराध पहले ही क्षमा कर चुके हैं और यह उसका एक सौ एकवां अपराध है, उसे सुदर्शन चक्र से मार डाला। शिशुपाल के मृत शरीर का परित्याग कर एक प्रकाश-पुंज आकाश की ओर उठा। उस प्रकाश-पुंज ने श्रीकृष्ण को प्रणाम किया तथा फिर उन्हीं में विलीन हो गया।पांडवों ने शिशुपाल का अंत्येष्टि संस्कार किया तथा उसके पुत्र का राज्याभिषेक किया।

मंगलवार, 21 जनवरी 2014

क्या आप जानते है चिट्ठी पर क्यों जरूरी होता है पिनकोड ?




                                 


क्या आप जानते है कि पिनकोड क्या है और इसका उपयोग किसलिए होता है। 
डाक से भेजे जाने वाले लिफाफे ,अंतर्देशीय या पोस्टकार्ड्स आदि में पते के स्थान पर एक छोटा आयताकार बॉक्स बना होता है। यह बॉक्स छः हिस्सो में बटा होता है ,जिसमे अंक भरे जाते है। डाक विभाग के लिए ये छः नंबर अहम् होते है,जिन्हे पिन कोड कहते है। 
                        

                              




पिनकोड,विशेष कोड़ होता है, जो डाक वितरण करने वाले डाक घरो को आवंटित किये जाते है। अगर पत्र या डाक में पते के साथ पिनकोड लिखा होता है ,जिससे पत्र जल्दी पहुचना निश्चित हो जाता है। 


  • पिनकोड का पहला अंक एक खास क्षेत्र या राज्य को दर्शाता है।
  • दूसरा और तीसरा मिलकर उस क्षेत्र को दर्शाता है,जहाँ वितरण करने वाला डाक घर स्थित है। 
  • बाद के तीन अंक उस डाकघर को दर्शाते है,जहाँ डाक का वितरण होना है।  
पिनकोड से पहले वितरण क्षेत्र प्रणाली थी। इसके तहत हर वितरण डाकघर को एक विशिष्ट संख्या दी गयी थी। इसे कई बड़े में लागु किया गया था। 

१ अप्रैल,१७७४ को जब डाक की सुबिधाये जनता को उपलब्ध करायी गई,उस समय तीन डाक cercle थे - बंगाल,मुम्बई और मद्रास। 

भारत में १५ अगस्त,१९७२ में वर्तमान पिनकोड सिस्टम कि शुरुआत हुई। इस समय देश में ९ पिन कोड रीज़न है। इससे पहले रीसनल सिस्टम लागु था,जिसे १९४६ में शुरु किया गया। इसे वितरण क्षेत्र संख्या प्रणाली कहा जाता है।   

शनिवार, 18 जनवरी 2014

विश्व में पायी जाने वाली विशाल मूर्तिया

             

शिव कैलाश नाथ महादेव की मूर्ति सांगा, नेपाल में है। इसकी उंचाई 45 मीटर है।


                               

मुरुगन मूर्ति मलेशिया के बटु गुफा में है। इसकी उंचाई 42.7 मीटर है।

               

वीरा अभया अंजनया हनुमान स्वामी की मूर्ति आंध्र प्रदेश में है। इसकी उंचाई 41 मीटर है।

              

कर्नाटक के मुरुदेश्वरा में शिव की मूर्ति है। इसकी उंचाई 37 मीटर है।

                                

मॉरिशस में मंगल महादेव के रूप में शिव की मूर्ति है। इसकी उंचाई 33 मीटर है।

               

शिमला ( हिमाचल प्रदेश) में हनुमानजी की मूर्ति। इसकी उंचाई 33 मीटर है।

              

नंदुरा (महाराष्ट्र) में हनुमानजी की मूर्ति। इसकी उंचाई 32 मीटर है।

              
हर-की-पौड़ी, हरिद्वार (उत्तराखंड) में भगवान शिव की मूर्ति। इसकी उंचाई 30.5 मीटर है।


             
कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में गणेश-चिन्मया गणाधीश की मूर्ति। इसकी उंचाई 26 मीटर है।

बुधवार, 15 जनवरी 2014

भारत के राज्य,राजधानी और भाषाएँ


प्रदेश का नामराजधानीभाषा/बोली
आंध्र प्रदेशहैदराबादतेलुगु, उर्दू 
अरुणाचल प्रदेशइटानगरतागेन , ,मोनपा ,मिजी,अका
टागिन,अडी,होंपा,बंगिनि-निशि
आसामदिसपुरअसमिया 
बिहारपटनाहिंदी
छत्तीसगढ़रायपुरहिंदी, छत्तीसगढ़ी
गोवापणजीमराठी, कोंकणी 
गुजरातगाँधीनगरगुजराती 
हरयाणाचंडीगढ़हिंदी, हरयाणवी
हिमाचल प्रदेशशिमलाहिंदी, पहाड़ी
मिजोरमएजवालमिजो, अंग्रेजी
जम्मू और काश्मीरश्रीनगर (ग्रीष्मकालीन)
जम्मू (शीतकालीन)
कश्मीरी,डोंगरी,उर्दू, लद्दाखी
पहाड़ी, पंजाबी,  बाल्टी 
झारखंडरांचीहिंदी
कर्नाटकबेंगलोरकन्नड़ 
केरलत्रिवेन्द्रममलयालम 
मध्य प्रदेशभोपालहिंदी
महाराष्ट्रमुंबईमराठी, हिंदी
मणिपुरइम्फालमणिपुरी
मेघालयशिलांगखासी,जयन्तियागारो,अंग्रेजी
नागालैंडकोहिमाकोयांक,अंगामी,सेमा,लोथा,चांग
उड़ीसाभुवनेश्वरउड़िया 
पंजाबचंडीगढ़पंजाबी
राजस्थानजयपुरराजस्थानी, हिंदी
सिक्किमगंगटोकभुया,हिंदी,नेपाली,लेप्चा,लिंबु
तमिलनाडुचेन्नईतामिल 
त्रिपुराअगरतलाबंग्ला,त्रिपुरी,मनिपुरी, काकबोराक 
उत्तर प्रदेशलखनउहिंदी
उत्तरांचलदेहरादूनहिंदी
पश्चिम बंगालकोलकाताबंगाली


How to memorize states of India?

भारत गणराज्य अट्ठाईस प्रदेश । केन्द्र शासित सात ही शेष॥
उत्तर उत्तरा मध्य पश्चिमी । छत्तीस राजा झाड़ सिक्कमी॥
मेघ नाग मणि मजे त्रिपुरारी। अंध उड़ काना तमिल बिहारी॥
कश पंजाबी गूजे महा कोला। आशा अरुण हरी हिम गोला॥

उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, छत्तीस गढ़, राजस्थान, झारखण्ड, सिक्किम,
 मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, आन्ध्र प्रदेश, ओड़िशा, कर्णाटक, तमिलनाडु,
 बिहार, काश्मीर, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, आसाम, अरुणांचल प्रदेश, हरियाणा,
 हिमाचल प्रदेश व गोवा। भारत में कुल 627 ज़िले हैं। 
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा ज़िला है- कच्छ। 
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा राज्य गोआ(गोवा) और सबसे बड़ा है राजस्थान।

भारत के केन्द्र शासित प्रदेश

दिल्ली दमन दादरा अंडा। चंडी लक्ष्य सात ही पंडा ॥
दिल्ली, दमन दीव, दादरा व नगर हवेली, अंडमान निकोबार, चन्डीगढ़ व लक्ष्य द्वीप। 

मंगलवार, 14 जनवरी 2014

मप्र को मिला स्टेट ऑफ द ईयर पुरस्कार

                                         मप्र को मिला स्टेट ऑफ द ईयर पुरस्कार
भोपाल. तेज गति से विकास के लिए मप्र को सोमवार को स्टेट ऑफ द ईयर पुरस्कार से नवाजा गया। मुंबई में एक गरिमामय समारोह में सीएनबीसी 18 द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह पुरस्कार दिया गया। इस दौरान चौहान ने कहा कि मप्र को बीमारू राज्य से निकालकर विकसित राज्य के रूप में लाना बड़ी चुनौती थी। हमने इसे स्वीकार किया और जनता को भी विकास में भागीदार बनाया। चौहान ने कहा कि जहां चाह होती है वहां राह निकल आती है। उन्होंने कहा कि अब आगे प्रदेश को निवेश के क्षेत्र में देश का नंबर एक प्रदेश बनाने की चाहत है।

रविवार, 12 जनवरी 2014

जाने विश्व में पाये जाने वाले साँपों के बारे में

Different types of Snakes
दुनिया में मुख्तलिफ़ (विभिन्न) प्रकार के साँप पाए जाते हैं जिनमें से कुछ ज़हरीले होते है तो कुछ ज़हरीले नहीं होते हैं. पौराणिक विश्वास के अनुसार माना जाता है कि साँप दुनियाँ के सबसे पहले और सबसे पुराने सरीसृप (Reptiles) हैं. आज मैं आपको इस आलेख में दुनियाँ भर में पाए जाने वाले साँपों के बारे में कम शब्दों में बताऊंगा, मैं बताऊंगा कि दुनियाँ में कितने प्रकार के साँप पाए जाते हैं. 


सामान्यतया साँप को एक बेहद ज़हरीला, विषैला और ख़तरनाक जन्तु माना जाता है जिसके काटने से फ़ौरन ही किसी की मौत हो जाती है. लोग साँप का नाम सुनते ही मन में एक विचार ले आते हैं कि साँप मृत्यु का दुसरा नाम है. जबकि ऐसा कदापि नहीं है, कुछ साँप बिल्कुल भी ज़हरीले नहीं होते हैं, बल्कि बहुत सीधे और शांत भी होते हैं. वैसे अगर ज़हरीले साँपों का ज़िक्र किया जाये तो दुनियाँ में कुल चार तरह के ज़हरीले साँप होते हैं:- 

1. एलापिड्स (Elapid Snake) 
2. वैपरिड्स (Viperidae Snakes) 
3. कोलुब्रिड्स (Colubrid Snakes) 
4. हाइड्रोफ़ाईडी (Hydrophiidae Snakes) 

एलापिड्स (Elapid Snake): 

एलापिड्स परिवार के साँप दुनियाँ में उष्णकटिबंधीय अथवा अर्थ-उष्णकटिबंधीय इलाकों में पाए जाते हैं. इस परिवार में 231 जातियां होती है. कुछ एलापिड्स के सदस्यों का नाम इस प्रकार है: कोबरा (Cobra), किंग कोबरा (King Cobra), करैत (Karait)! सभी के सभी बेहद ज़हरीले होते हैं. दुनियाँ का सबसे ख़तरनाक ज़हरीला साँप काला माम्बा (Black Mamba) इसी परिवार का अंग है. 

वैपरिड्स (Viperidae Snakes): 

वाइपर अथवा वाईपराइड्स पूरी दुनियाँ में पाए जाते है सिवाय ऑस्ट्रेलिया और मेडागास्कर. इनका मुहँ अपेक्षाकृत थोड़ा बड़ा होती है. जिससे ये शिकार को आसानी से बेहतर तरीके से पकड़ लेते हैं. इस परिवार में 4 जातियां होतीं हैं: आज़ेमिओपिनि (Azemiopinae), वाइपरनी (Vipernae), क्रोटेलिनी (Crotalinae) और काउसिनी (Causinae). 

कोलुब्रिड साँप (Colubrid Snakes): 

कोलूब्रिडी परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं. इनकी खासियत है कि इनका पूरा शरीर स्केल्स से ढंका होता है. सामान्यतः यह परिवार नुकसान-रहित है और इनमें ज़हर नहीं पाया जाता है लेकिन कुछ साँप इनमें ऐसे भी हैं जिनके नुकीले दांत उनके मुह के पीछे की तरफ़ होते हैं और वे नुकसान दायक होते हैं लेकिन वह केवल अफ्रीकन ही होते हैं. इस परिवार के सदस्यों में कुछ साँप रानी साँप (Queen Snake), राजा साँप (King Snake), ताज साँप, बैल साँप (Bull Snake), चूहा साँप (Mouse Snake), मोज़ाबंध साँप, चिकना साँप, पानी साँप (Water Snake), दुधहिया साँप, बेल साँप, पेड़ पर रहने वला साँप आदि हैं. रानी साँप (Queen Snaik) ज़हरीला नहीं होता है और यह 60 सेंटीमीटर से ज़्यादा लम्बा नहीं होता है. जैतूनी रंग और गहरे भूरे रंग के होते हैं. 

हाइड्रोफ़ाईडी (Hydrophiidae Snakes): 

इन्‍हें समुद्री सांप (Sea Snake) भी कहते हैं। समुद्री साँप में कई तरह की प्रजातियाँ होती हैं. वे ज़मीन की तुलना में पानी में ज़्यादा निवास करते हैं. समुद्री साँप कोबरा (Cobra) समूह से सम्बंधित होता है. वे दो मीटर तक लम्बे होते हैं. इनके परिवार में पचास से ज़्यादा प्रजातियाँ होती है और जिनमें से अधिकतर ज़हरीली होती हैं. इनके उपरे जबड़े में अपेक्षाकृत छोटे, नुकीले और थोड़े खोखले दांत होते हैं. इनमें लगभग 1.5 मिलीग्राम तक ज़हर होता है. समुंद्री साँप थलीय साँप की अपेक्षा ज़्यादा ज़हरीले होते हैं.

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