पृथ्वी सूर्य से तीसरा ग्रह है पृथ्वी सौर मंडल में व्यास द्रव्यमान और घनत्व में सबसे बड़ा स्थलीय ग्रह है। इसका पृथ्वी, पृथ्वी ग्रह संसार, और टेरा के रूप में भी उल्लेख होता है।
मानव (human) सहित पृथ्वी लाखों प्रजातियों (species) का घर है ,पृथ्वी ही ब्रह्मांड में एकमात्र वह स्थान है जहाँ जीवन (life) अस्तित्व के लिए जाना जाता है . वैज्ञानिक सबूत संकेत देतें है कि ग्रह का गठन ४.५४ अरब वर्ष (4.54 billion years) पहले,[7][8][9][10] और उसकी सतह पर जीवन लगभग एक अरब वर्ष पहले प्रकट हुआ. तब से, पृथ्वी के जीवमंडल ने ग्रह पर पर्यावरण (the atmosphere) और अन्य अजैवकीय (abiotic) परिस्थितियों को बदल दिया है ताकि वायुजीवी जीवों (aerobic organisms) के प्रसारण, साथ ही साथ ओजोन परत (ozone layer) के निर्माण को रोका जा सके जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र (Earth's magnetic field) के साथ हानिकारक विकिरण को रोक कर जमीन पर जीवन की अनुमति देता है.
पृथ्वी की बाहरी सतह (outer surface) कई कठोर खंडों या विवर्तनिक प्लेट में विभाजित है जो क्रमशः कई लाख सालों (many millions of years) की अवधी में पूरे सतह से विस्थापित होती है. सतह का करीब ७१% नमक जल (salt-water) के सागर से आच्छादित है , शेष में महाद्वीप और द्वीप ; तरल पानी अवस्थित हैं, जो सभी ज्ञात जीवन के लिए आवश्यक है , जिसका अन्य ग्रह के सतह पर अस्तित्व ज्ञात नही है पृथ्वी का आतंरिक सतह एक अपेक्षाकृत ठोस भूपटल (mantle) की मोटी परत के साथ सक्रिय रहता है , एक तरल बाहरी कोर जो एक चुम्बकीय क्षेत्र और एक ठोस लोहा का आतंरिक कोर (inner core) को पैदा करता है
पृथ्वी बाह्य अंतरिक्ष (outer space), में सूर्य और चंद्रमा समेत अन्य वस्तुओं के साथ क्रिया करता है वर्तमान में , पृथ्वी मोटे तौर पर अपनी धुरी का करीब ३६६.२६ बार चक्कर काटती है यह समय की लंबाई एक नाक्षत्र वर्ष (sidereal year)है जो ३६५.२६ सौर दिवस (solar day) के बराबर है पृथ्वी की घूर्णन की धुरी इसके कक्षीय समतल (orbital plane) से लम्बवत (perpendicular) २३.४ की दूरी पर झुका (tilted) है जो एक उष्णकटिबंधीय वर्ष (tropical year) ( ३६५.२४ सौर दिनों में ) की अवधी में ग्रह की सतह पर मौसमी विविधता पैदा करता है पृथ्वी का एकमात्र ज्ञात उपग्रह चंद्रमा (natural satellite) है, जिसने इसकी परिक्रमा ४.५३ बिलियन साल पहले शुरू की, समुद्री ज्वार पैदा करता है , धुरिय झुकाव को स्थिर रखता है और धीरे - धीरे ग्रह के घूर्णन को धीमा करता है ग्रह के प्रारंभिक इतिहास के दौरान एक धूमकेतु की बमबारी ने महासागरों के गठन में भूमिका निभाया. बाद में छुद्रग्रह (asteroid) के प्रभाव ने सतह के पर्यावरण पर महत्वपूर्ण बदलाव किया
आंतरिक संरचना
पृथ्वी कई परतों में विभाजित है जो विशिष्ट रासायनिक और भूकंपी गुण से अलग अलग है :(गहराई किमी में है)
- 0-40 भूपटल
- 40-400 ऊपरी मैंटल
- 400-650 संक्रमण क्षेत्र
- 650-2700 अंत: मैंटल
- 2700-2890 डी परत
- 2890-5150बाह्य केन्द्रक
- 5150-6378 अंत: केन्द्रक
- वातावरण = 0.0000051
- महासागर = 0.0014
- भूपटल = 0.026
- मैंटल =4.043
- बाहरी केन्द्रक = 1.835
- भीतरी केन्द्रक = 0.09675
केन्द्रक मुख्यतः लोहे(लोहा/निकेल) का बना है लेकिन हो सकता है कुछ हल्के तत्व भी मौजूद हो। केन्द्रक पर तापमान ७५०० डीग्री केल्वीन है। अंतः मैंटल मुख्यतः सीलीकान , मैग्नेशीयम, आक्सीजन से बना है जिसमे कुछ लोहा, कैल्सीयम और अल्म्युनियम भी है। उपरी मैंटल सतह लौह और मैग्नेशीयम के सीलीकेट से बनी है। यह सब हम भूगर्भीय गतिविधियो से जानते है, ज्वालामुखी का लावा निचली परतो के नमूने उपर लाते रहता है। भूपटल सीलीकान डाय आक्साईड के क्रिस्टलो से बनी है।
पृथ्वी की रासायनिक संरचना
धरती का घनत्व पूरे सौरमंडल मे सबसे ज्यादा है। बाकी चट्टानी ग्रह की संरचना कुछ अंतरो के साथ पृथ्वी के जैसी ही है। चन्द्रमा का केन्द्रक छोटा है, बुध का केन्द्र उसके कुल आकार की तुलना मे विशाल है, मंगल और चंद्रमा का मैंटल कुछ मोटा है, चन्द्रमा और बुध मे रासायनिक रूप से भिन्न भूपटल नही है,सिर्फ पृथ्वी का अंत: और बाह्य मैंटल परत अलग है। ध्यान दे कि ग्रहो(पृथ्वी भी) की आंतरिक संरचना के बारे मे हमारा ज्ञान सैद्धांतिक ही है।भू पटल
अन्य चट्टानी के विपरित पृथ्वी का भूपटल कुछ ठोस प्लेटो मे विभाजित है जो निचले द्रव मैंटल पर स्वतण्त्र रूप से बहते रहती है। इस गतिविधी को प्लेट टेक्टानिक कहते है। (वर्तमान में) आठ प्रमुख प्लेट:- उत्तर अमेरिकी प्लेट – उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी उत्तर अटलांटिक और ग्रीनलैंड
- दक्षिण अमेरिकी प्लेट – दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी दक्षिण अटलांटिक
- अंटार्कटिक प्लेट – अंटार्कटिका और “दक्षिणी महासागर”
- यूरेशियाई प्लेट – पूर्वी उत्तर अटलांटिक, यूरोप और भारत के अलावा एशिया
- अफ्रीकी प्लेट – अफ्रीका, पूर्वी दक्षिण अटलांटिक और पश्चिमी हिंद महासागर
- भारतीय -आस्ट्रेलियाई प्लेट – भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और हिंद महासागर के अधिकांश
- नाज्का प्लेट – पूर्वी प्रशांत महासागर से सटे दक्षिण अमेरिका
- प्रशांत प्लेट – प्रशांत महासागर के सबसे अधिक (और कैलिफोर्निया के दक्षिणी तट!)
जल की उपस्थिति
पृथ्वी की सतह का ७०% हिस्सा पानी से ढंका है। पृथ्वी अकेला ग्रह है जिस पर पानी द्रव अवस्था मे सतह पर उपलब्ध है।(टाइटन पर द्रव इथेन या मिथेन हो सकती है, युरोपा की सतह के निचे द्रव पानी हो सकता है।) हम जानते है कि जिवन के लिये द्रव जल आवश्यक है। सागरो की गर्मी सोखने की क्षमता पृथ्वी के तापमान को स्थायी रखने मे महत्वपूर्ण है। द्रव जल पृथ्वी सतह के क्षरण और मौसम के लिये महत्वपूर्ण है।(मंगल पर भूतकाल मे शायद ऐसी गतिविधी हुयी हो सकती है।)वातावरण
पृथ्वी के वातावरण मे ७७% नायट्रोजन, २१% आक्सीजन,और कुछ मात्रा मे आर्गन,कार्बन डाय आक्साईड और जल बाष्प है। पृथ्वी पर निर्माण के समय कार्बन डाय आक्साईड की मात्रा ज्यादा रही होगी जो चटटानो मे कार्बोनेट के रूप मे जम गयी, कुछ मात्रा मे सागर द्वारा अवशोषित कर ली गयी, शेष कुछ मात्रा जिवित प्राणियो द्वारा प्रयोग मे आ गयी होगी। प्लेट टेक्टानिक और जैविक गतिविधी कार्बन डाय आक्साईड का थोड़ी मात्रा का उत्त्सर्जन और अवशोषण करते रहते है। कार्बनडाय आक्साईड पृथ्वी के सतह का तापमान का ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा नियंत्रण करती है। ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी सतह का तापमान ३५ डीग्री सेल्सीयस होता है अन्यथा वह -२१ डीग्री सेल्सीयस से १४ डीग्री सेल्सीयस रहता; इसके ना रहने पर समुद्र जम जाते और जिवन असंभव हो जाता। जल बाष्प भी एक आवश्यक ग्रीन हाउस गैस है।रासायनिक दृष्टी से मुक्त आक्सीजन भी आवश्यक है। सामान्य परिस्थिती मे आक्सीजन विभिन्न तत्वो से क्रिया कर विभिन्न यौगिक बनाती है। पृथ्वी के वातावरण मे आक्सीजन का निर्माण और नियंत्रण विभिन्न जैविक प्रक्रियाओ से होता है। जिवन के बिना मुक्त आक्सीजन संभव नही है।
चंद्रमा
चन्द्रमा पृथ्वी के घुर्णन को अपने गुरुत्व से हर सदी मे २ मीलीसेकन्ड कम कर देता है। ताजा शोधो के अनुसार ९० करोड़ वर्ष पहले एक वर्ष मे १८ घंटो के ४८१ दिन होते थे।चुंबकिय क्षेत्र
पृथ्वी का अपना चुंबकिय क्षेत्र है जो कि बाह्य केन्द्रक के विद्युत प्रवाह से निर्मित होता है। सौर वायू ,पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र और उपरी वातावरण मीलकर औरोरा बनाते है। इन सभी कारको मे आयी अनियमितताओ से पृथ्वी के चुंबकिय ध्रुव गतिमान रहते है, कभी कभी विपरित भी हो जाते है। पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र और सौर वायू मीलकर वान एण्डरसन विकिरण पट्टा बनाते है, जो की प्लाज्मा से बनी हुयी डोनट आकार के छल्लो की जोड़ी है जो पृथ्वी के चारो की वलयाकार मे है। बाह्य पट्टा १९००० किमी से ४१००० किमी तक है जबकि अतः पट्टा १३००० किमी से ७६०० किमी तक है।इतिहास
वैज्ञानिक ग्रह के भूतकाल की जानकारी के बारे में विस्तृत सूचना को एकत्र करने में सफल रहे हैं.सौर मंडल में पृथ्वी और अन्य ग्रह ने ४.५४ बिलियन वर्ष पहले सौर निहारिका (solar nebula) का गठन किया, जो एक डिस्क के आकार का धूल और गैस का गोला था , जो सूर्य के निर्माण से शेष बचा था.प्रारंभ में पिघला हुआ (molten), जब पानी वातावरण में इकट्ठा हो गया तब पृथ्वी की बाहरी परत एक ठोस परत के निर्माण के लिए ठंडी हो गई. तुरंत बाद चंद्रमा का निर्माण हुआ , संभवतः पृथ्वी के १०% द्रव्यमान के साथ पृथ्वी के तिरछे प्रहार के प्रभाव के साथ मंगल के आकार की वस्तु के परिणामस्वरूप ( कभी ठिया (Theia) कहा गया ) इस वस्तु का कुछ द्रव्यमान पृथ्वी के साथ मिल गया होगा और एक हिस्सा अन्तरिक्ष में प्रवेश कर गया होगा ,पर कक्षा में चंद्रमा के निर्माण के लिए पर्याप्त सामग्री भेजा गया होगाअधिक गैस और ज्वालामुखी की क्रिया ने आदिम वातावरण को उत्पन्न किया .संघनितजल वाष्प (water vapor), क्षुद्रग्रह और बड़े आद्य ग्रह , धूमकेतु और नेप्चून के पार से निष्पादित संवर्धित बर्फ और तरल पानी से महासागर उत्पन्न हुआ (produced the oceans). माना जाता है कि उच्च ऊर्जा रसायन विज्ञान ने करीब ४ अरब साल पहले स्वयं नकल अणु का उत्पादन किया और आधे अरब साल बाद पिछले आम जीवन के सभी पूर्वज (last common ancestor of all life) अस्तित्व में थे.
प्रकाश संश्लेषण के विकास ने सूर्य की उर्जा का प्रत्यक्ष जीवन में उपयोग करने की अनुमति दी, परिणामतः ऑक्सीजन वातावरण में संचित हुआ और ओजोन (ऊपरी वायुमंडल में आणविक ऑक्सीजन [o३] का एक प्रकार ) की एक परत के रूप में परिणत हुआ .बड़ी कोशिकाओ के साथ छोटी कोशिकाओं के समावेश के परिणामस्वरुप युकार्योतेस (development of complex cells) कहे जाने वाले जटिल कोशिकाओं का विकास में हुआ. कोलोनियों के अंतर्गत सच्चे बहु कोशिकीय जीवो के रूप में वर्धमान विशेषीकृत होता है ओजोन परत (ozone layer) द्वारा हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण से सहायता प्राप्त जीवन पृथ्वी पर संघनित हुआ
बिना किसी शुष्क भूमि की शुरुआत के समुद्र के ऊपर सतह की कुल मात्रा लगातार बढ़ रही है पिछले दो अरब सालों के दौरान, उदहारण के लिए , महादेशों का कुल परिमाण दोगुनी हो गई.सैकड़ों लाखों साल से अधिक समय से स्वयं को लगातार दुबारा आकार दिया ,जिससे महादेश बने और टूटे .महादेश पूरे सतह से कभी कभी एक वृहत महादेश (supercontinent) के संयोजन के निर्माण के लिए विस्थापित हुए.लगभग ७५० करोड़ साल पहले म्या (mya)), सबसे पहले जन जाने वाला शीर्ष महादेश , रोडिनिया (Rodinia) अलग से प्रकट होने लगा .महादेश बाद में ६०० – ५४० ;म्या पनोसिया{ (Pannotia) के निर्माण के लिए दुबारा एकीकृत हुए , तब अंततः पन्गेया (Pangaea) १८० म्या अलग से प्रकट हुआ
१९६० के बाद से यह मन गया की ७५० और ५८० लाख साल के बीच में गंभीर ग्लासिअल क्रिया नियोप्रोतेरोजोइक (Neoproterozoic) के दौरान अधिकांश सतह को एक बर्फ की चादर में ढक लिया इस परिकल्पना को पृथ्वी हिमगोला (Snowball Earth) कहा गया, और यह विशेष रुचि का है क्योंकि जब बहु कोशिकीय जीवन प्रारूप प्रसारित हुआ तब यह कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) से पहले हुआ .
कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) के करीब ५३५ म्या के बाद पाँच व्यापक विनाश हुए हैं (mass extinctions) विनाश की अन्तिम घटना ६५ म्या में हुआ जब एक उल्का के टक्कर ने संभवतः ( गैर पक्षी ) डायनासोर और अन्य बड़े सरीसृप के विनाश को प्रेरित किया , पर स्तनपायी जैसे छोटे जानवरों को प्रसारित किया जो तब छुछुंदर से मिलते थे .पिछले ६५ लाख साल पहले से , स्तनपायियों का जीवन विविधता पूर्ण है और कई लाख साल पहले एक अफ्रीकी बन्दर के समान जानवर ने सीधा खड़ा होने की योग्यता प्राप्त की यह यंत्र का उपयोग किया और संचार साधन को प्रेरित किया जिसने एक वृहत मस्तिष्क के लिए आवश्यक पोषण और उत्तेजना प्रदान किया .कृषि के विकास ने , और तब सभ्यता ने, मानव को छोटे काल अवधी में पृथ्वी को प्रभावित करने की अनुमति दी, जो प्रकृति और अन्य जीवों को प्रभावित किया.
हिम युग (ice age) का वर्तमान स्वरूप करीब ४० लाख साल पहले प्रारम्भ हुआ, तब करीब ३ लाख साल बाद अभिनूतन (Pleistocene) तीव्र हुआ ध्रुवीय क्षेत्र तबसे हिमाच्छादन और गलन के क्रमिक चक्र को प्रत्येक ४० - १००,००० सालों में दुहराया है .अन्तिम हिम युग की समाप्ति लगभग १०,००० साल पहले हुई.
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