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शनिवार, 16 नवंबर 2013

कहानी संसद की







स्‍वराज पार्टी को 1923 के चुनावों में बहुत सफलता मिली। स्‍वराज पार्टी ने 145 स्‍थानों में से 45 स्‍थान जीते। पार्टी केंद्रीय विधानमंडल मेंसबसे बड़ी पार्टी बन गई। मौलाना आजाद के अनुसार पार्टी की सबसे बड़ी सफलता यह थी कि वह उन स्‍थानों पर भी जीत गई जो मुसलमानों के लिए आरक्षित थे। कुछ निर्दलीय सदस्‍यों तथा पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्‍व वाली नेशनल पार्टी ने उन्‍हें समर्थन दिया। इस प्रकार पूर्ण बहुमत मिल गया। मोतीलाल नेहरू के नेतृत्‍व में स्‍वराजवादियों ने राष्‍ट्रीय महत्‍व के अनेक प्रस्‍तावों पर सरकार को पराजित किया। बजट तथा अनेक विधायी उपायों के पास होने में बार बार रूकावटें डालीं। अनेक बार सदन से बहिर्गमन अथवा वाक आउट किये। स्‍वराजवादियों की कोशिशों के चलते 1924 और 1925 में राष्‍ट्रीय मांग संबंधी संकल्‍प भारी बहुमत से पास हुए।
1935 के भारत सरकार अधिनियम में भारत में एक परिसंघीय ढांचे की व्‍यवस्‍था रखी गई। अधिनियम में कहा गया था कि संघीय विधानमंडल में गवर्नर-जनरल तथा दो सदन होगें। जिन्‍हें क्रमशः कौंसिल आफ स्‍टेट (उपरि सदन) तथा हाउस आफ असेम्‍बलि (निम्‍न सदन)कहा जाएगा। कौंसिल में ब्रिटिश इंडिया के 156 प्रतिनिधि और भारतीय रियासतों के अधिक‍तम 104 प्रतिनिधि होंगे। निम्‍न सदन में ब्रिटिश इंडिया के 250 प्रतिनिधि तथा भारतीय रियासतों के अधिकतम 125 प्रतिनिधि होंगे। उपरि सदन एक स्‍थायी निकाय होगा जिसे भंग नहीं किया जा सकेगा। परंतु उसके एक-तिहाई सदस्‍य हर तीसरे साल सेवानिवृत हो जाएंगे। प्रत्‍येक संघीय असेम्‍बली, पाँच वर्षों तक कार्य करेगी। अधिनियम में उपरि सदन के लिए प्रत्‍यक्ष चुनाव का और निम्‍न सदन के लिए अप्रत्‍यक्ष चुनाव का तरीका अपनाया गया था।
संविधान सभा (विधायी) की एक अलग निकाय के रूप में पहली बैठक 17 नवंबर 1947 को हुई। इसके अध्‍यक्ष सभा के प्रधान डा० राजेन्‍द्र प्रसाद थे। संविधान अध्‍यक्ष पद के लिए केवल श्री जी.वी. मावलंकर का एक ही नाम प्राप्‍त हुआ था। इसलिए उन्‍हें विधिवत चुना हुआ घोषित किया गया। 14 नवंबर 1948 को संविधान का प्रारूप संविधान सभा में प्रारूप समिति के सभापति बी.आर. आम्‍बेडकर ने पेश किया। प्रस्‍ताव के पक्ष में बहुमत था। 26 जनवरी 1950 को स्‍वतंत्र भारत के गणराज्‍य का संविधान लागू हो गया। इसके कारण आधुनिक संस्‍थागत ढांचे और उसकी अन्‍य सब शाखा-प्रशाखाओं सहित पूर्ण संसदीय प्रणाली स्‍थापित हो गई। संविधान सभा भारत की अस्‍थायी संसद बन गई। वयस्‍क मताधिकार के आधार पर पहले आम चुनावों के बाद नएसंविधान के उपबंधों के अनुसार संसद का गठन होने तक इसी प्रकार कार्य करती रही।



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